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अहंकार…

आज एक और रावण का दहन करते है

वो रावण, जो हम सब में है

वही रावण, जो रावण के  मृत्यु का कारण बना

वो रावण, जो शायद थोड़ा मुझ में भी है

या यूँ बोल लो की हम सब में उसकी पकड़ है ।

 

किस आकलन पर हम तौलते है सच्चाई को यह भी जरूरी है ।

सम्पूर्ण सच कुछ नहीं होता,

होता है तो बस, तुम्हारा सच या मेरा सच ।

जरूरत है आकलन की,

सवाल की, विश्वास से पहले

वो प्रश्न जो लोगों को डर के साए में खींच देता है

वो प्रश्न जिसके उत्तर उन्हें भी न मालूम

डरते है वो हमारे सवालों से

बस इतना ही पूछता हूं हर बार क्यों ?

 

अहंकार है वो रावण, या बोल दूँ

‘मैं’ है वो रावण,

“मैं कैसे बोल दूँ किसी छोटे को की मुझे उत्तर नहीं आता

इससे अच्छा तो अपने अहम को मरहम कर दूँ”


शुभम कुमार भारती

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Author:

Freelance Writer/ Blogger, Production & Journalism Student, Bachelor in Mass Communication - Guru Jambheshwar University

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