अनुभव

वो आदत झुकने की
शायद बड़े थे इसलिये
थोड़ी अदब, थोड़ी तहजीब
यही सिखता था बचपन से ।
“छोटो को इज़्ज़त दो,
बड़़ो को दो सम्मान” ,
काम नही चलता अब इससे,
पूरी दुनिया है बेईमान ।

शब्द नहीं वो बाण चले थे,
तरकस छूट कमान चले थे
मुख में राम बगल में छुरी
सही करने इंसान चले थे ।

एक चाह रहती है मुझ में भी
की मैं भी वो इंसान बनो
लोगो पे हँसकर,
ताकतवर होने का रसपान करू ।
महसूस करू उस ताकत को
जो चंद पालो की वारिस है
अनुभव कर लुं इसका भी
जो धतूरा उन्मत सागर है ।

अनुभव, बहुत सिकता है
वक़्त भी पाठ पढ़ाता है
कुछ गलती से पहले ही
एक सबक सिखा कर जाता है ।

– शुभम कुमार भारती

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s